बिहार विधानसभा में वित्त मंत्री ने 2025-26 के लिए 3.17 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया। इस बजट में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समाज के विभिन्न वर्गों के लिए योजनाओं की घोषणा की, लेकिन विपक्ष द्वारा प्रस्तावित ‘मुफ्तखोरी’ योजनाओं को शामिल नहीं किया गया। इससे सियासी हलचल तेज हो गई है।
महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं
इस बार के बजट में महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रमुख शहरों में ‘पिंक बस’ सेवा शुरू की जाएगी, जिसमें चालक, कंडक्टर और यात्री सभी महिलाएं होंगी। इसके अलावा, पटना में महिला हाट की स्थापना और शहरों में कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास खोलने की योजना बनाई गई है।
मुफ्त योजनाओं पर क्यों नहीं दिया जोर?
विपक्ष ने आगामी चुनावों को देखते हुए मुफ्त बिजली, बेरोजगारी भत्ता और कई अन्य योजनाओं का वादा किया था। लेकिन नीतीश कुमार ने इन योजनाओं को बजट में जगह नहीं दी। उनका मानना है कि राज्य की आर्थिक स्थिरता और सतत विकास के लिए वित्तीय अनुशासन जरूरी है। इसलिए, उन्होंने मुफ्त सुविधाओं के बजाय रोजगार सृजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित किया।
नीतीश कुमार की प्रतिक्रिया
बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि यह बजट “न्याय के साथ विकास” के संकल्प को मजबूत करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार अपने संसाधनों का सही उपयोग कर बिहार के आर्थिक विकास को नई गति देगी।
राजनीतिक निहितार्थ
नीतीश कुमार के इस फैसले से विपक्ष को हमलावर होने का मौका मिल गया है। कई विपक्षी नेताओं ने इसे आम जनता के साथ अन्याय करार दिया है। वहीं, मुख्यमंत्री के समर्थक इसे दीर्घकालिक विकास के लिए सही कदम बता रहे हैं।
बिहार सरकार ने बजट में मुफ्त योजनाओं को शामिल न करके आर्थिक स्थिरता और विकास को प्राथमिकता दी है। अब देखना होगा कि यह रणनीति आगामी चुनावों में कितना कारगर साबित होती है।