सीरिया में चल रहे संघर्ष के बीच, अलावी समुदाय के लोगों ने भारत से मदद की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि उन्हें चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है और एक सुनियोजित नरसंहार का शिकार बनाया जा रहा है। हाल ही में सामने आए वीडियो और रिपोर्ट्स में अलावी नेताओं और आम नागरिकों ने दुनिया से अपील की है कि उनकी जान बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
अलावी समुदाय कौन हैं?
अलावी समुदाय मुख्य रूप से शिया इस्लाम का एक संप्रदाय है, जो सीरिया में एक अल्पसंख्यक समूह के रूप में रहता है। ये समुदाय सीरिया की कुल आबादी का लगभग 10-15% हैं और दशकों से वहां सत्ता में प्रभावी भूमिका निभाते रहे हैं। सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद भी इसी समुदाय से आते हैं।
अलावी समुदाय पर क्यों हो रहे हैं हमले?
सीरिया में गृहयुद्ध और आतंकी संगठनों के बढ़ते प्रभाव के चलते अलावी समुदाय लगातार निशाने पर रहा है। कट्टरपंथी गुटों द्वारा धार्मिक आधार पर इन्हें दुश्मन माना जाता है और इस्लामिक स्टेट (ISIS) सहित अन्य जिहादी संगठनों ने बार-बार इनके खिलाफ हिंसक हमले किए हैं।
- सामूहिक नरसंहार की घटनाएं
- गांवों और कस्बों पर बर्बर हमले
- महिलाओं और बच्चों का अपहरण
- धार्मिक स्थलों को तबाह करना
हालिया घटनाओं में, अलावी बहुल इलाकों में हवाई हमले, आत्मघाती हमले और सामूहिक हत्याएं तेजी से बढ़ी हैं।
भारत से क्यों मांगी जा रही है मदद?
अलावी समुदाय का मानना है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष और शांतिप्रिय देश है, जिसने हमेशा मानवाधिकारों और वैश्विक शांति की वकालत की है। उनकी अपील है कि भारत सरकार और भारतीय लोग उनके संघर्ष को समझें और उनकी आवाज़ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाएं।
- संयुक्त राष्ट्र में भारत इस मुद्दे को उठाए।
- मानवीय सहायता और राहत सामग्री भेजे।
- शरणार्थियों की मदद के लिए कदम उठाए।
- आतंकी संगठनों पर कड़ा रुख अपनाए।
क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय कुछ कर रहा है?
हालांकि संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संगठन सीरिया संकट पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन अब तक अलावी समुदाय की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। दुनिया का ध्यान फिलहाल यूक्रेन-रूस युद्ध और गाजा संघर्ष पर अधिक केंद्रित है, जिससे सीरिया के अल्पसंख्यक समुदाय की आवाज़ दब रही है।
अलावी समुदाय के लिए हालात दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं, और उनकी गुहार दुनिया तक पहुंचाना जरूरी है। भारत, जो हमेशा शांति और सहिष्णुता का प्रतीक रहा है, क्या इस संकट में कोई कदम उठाएगा? क्या वैश्विक मंच पर इस मुद्दे को उठाया जाएगा? यह समय बताएगा।
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